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क्या स्वयं-प्रकाशन लाभदायक व्यवसाय हो सकता है? (भाग 1)

क्या स्वयं-प्रकाशन लाभदायक व्यवसाय हो सकता है? यह प्रश्न केवल भारत में ही नहीं पुछा जाता है बल्कि पश्चिमी देशों में भी उतनी ही तीव्रता से उठाया जाता है|
मेरा विचार है की स्वयं-प्रकाशन पश्चिमी देशों में ज्यादा प्रचलित है| ऐसा नहीं कि भारत में इस सम्बन्ध में कोई रुचि या चेतना नहीं है| जहाँ तक मेरी जानकारी है अमिश त्रिपाठी और सावी शर्मा ने अपना लेखन का सफ़र स्वयं-प्रकाशन से किया था| उनकी लोकप्रियता के बाद ही स्थापित प्रकाशकों ने उन्हें अनुबंधित किया था|
आंकड़ोंपरआधारितअगरबातकरनीहोतो 2017 मेंJeffBezosनेअपनेshareholdersकोयहअधिकारिकसूचनादीथीकिउसवर्ष

Break Away from Narratives and Discourses

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It is the narratives and discourses, which makes the actual profile of your life, your mind and your ambitions.
You are never in the command. It is the discourse which you listen which directs your life. It is the narratives by others that makes contents of your talks. You do not realise that you do not understand, believe and accept, but you call all that you say as yours own. The narrative is formed by someone else, and you become the sounding board of that narrative. 

You are merely a body, a living entity, which is breathing. You have some intrinsic programmes already built into your system. You are breathing and living, and those programmes work their fixed course. The two dominant p are food and sex. You are a bundle of biochemical and neuro-snaps. The life activity is induced into you through breathing, the intrinsic programme workout their pre-fixed course. You cap it with a narrative which is given to you by a discourse while you are learning about yourself as a living orga…

एक manuscript के बहु-संकलन प्रकाशित करने का औचित्य

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नवीन शिक्षा पश्चिमी दर्शन और साहित्य से प्रभावित है| उस में दिए गये विषय पश्चिमी साहित्य में उपलब्ध रहते हैं| हिंदी भाषी विद्यार्थी गूढ़ और अव्यक्त सिधान्तों को विदेशी भाषा में समझने से चूक जाते हैं| एक विशेष स्तर पर उन्हें अंग्रेज़ी में व्यक्त भावों को उसी भाषा में ही निपटना पड़ता है जहाँ वह खुद को ठगा सा पाते हैं| अगर एक ही बात उन्हें अंग्रेज़ी और हिंदी में पढ़ने को मिल जाय तो वह विश्वास से हर प्रश्न को निपटते हैं|  

इस प्रकार के प्रकाशन का औचित्य ऊपर पहले से ही आलेखित किया है| यह सर्वमान्य है कि आप को किसी भी विषय पर अंग्रेज़ी भाषा में लिखित पुस्तक मिल जाएगी| आप किसी भी विश्वविद्यालय के किसी भी विषय के विद्यार्थी बनें, आप को वहां के पुस्तकालय में आप के विषय से संबधित अच्छी गिनती में अंग्रेज़ी में लिखी पुस्तकें उपलब्ध होंगी| वहीं अगर आप का माध्यम हिंदी है तो आप को हिंदी भाषा में कम पुस्तकें मिलेंगी| अगर आप एक कर्मठ छात्र हैं तो आप अंग्रेज़ी की पुस्तकों का अनुवाद करते हुए अपना काम चलाने की कोशिश कर सकते हैं परन्तु फिर भी आप के अध्ययन में एक कमी रह जाती है| दूसरा, आप को किसी स्तर पर अपने विषय …

One Manuscript and Four Versions

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नवीन शिक्षा पश्चिमी दर्शन और साहित्य से प्रभावित है| उस में दिए गये विषय पश्चिमी साहित्य में उपलब्ध रहते हैं| हिंदी भाषी विद्यार्थी गूढ़ और अव्यक्त सिधान्तों को विदेशी भाषा में समझने से चूक जाते हैं| एक विशेष स्तर पर उन्हें अंग्रेज़ी में व्यक्त भावों को उसी भाषा में ही निपटना पड़ता है जहाँ वह खुद को ठगा सा पाते हैं| अगर एक ही बात उन्हें अंग्रेज़ी और हिंदी में पढ़ने को मिल जाय तो वह विश्वास से हर प्रश्न को निपटते हैं|




यहाँ इस पुस्तक में दो पुस्तकों का संकलन किया गया है| एक पुस्तक का शीर्षक है “आधुनिक भारत हिस्टोरियोग्राफी पर निबंध संग्रह”| इस पुस्तक का ASIN B081CZBCZR है| दूसरी पुस्तक का शीर्षक है “Essays on Modern India Historiography”| इस पुस्तक का ASIN B07WD4T2K3 है| दोनों पुस्तकों की विषय सामग्री एक ही है| इन में केवल भाषा का अंतर है| इस संकलन को ऊपर बताई धारना के अनुरूप किया गया है| ऐसा भारतीय छात्रों की जरूरत को पूरा करने के लिए किया गया है|

इस पुस्तक में अध्यायों का निर्माण निम्नलिखित क्रम में किया गया है|

संदर्भ और प्रस्तावना
अध्याय 1:
अध्याय 2:
अध्याय 3:
अध्याय 4:
अध्याय 5:
English Version
C…

A Participation in an Event on pedagogy

I will be participating in a live debate in the following event on December 1, 2019.

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Advertising and Marketing by a Self-Publishing Writer

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There are many apprehensions and dilemmas on the saleability of books with which a self-publishing writer wrestle. They are the cause of forming such questions.
1.Will the book sell? 2. How will one sell the book? 3. How will the writer advertise his book? How much has to be spent on such activities?
Let me begin with a display of the report of my sales which had taken place in the last thirty days up to November 23, 2019.



Allow me to present my analysis on display. I am not a statistician (I envy them, and I do not know much about statistics). I direct your attention to the arrows in the display.
The arrows are aimed at three countries, namely India, America and Germany. These were countries where my books were bought. I substantiate it by adding that I am from India and write with an Indian audience in mind.
Look at the titles which were sold. They are five.
To achieve the figure for sale for November 2019, I have adopted following means. 1. I regularly posted on the multiple b…

Thus, I Read a Book: A Hybrid Volume of Essays on Modern India Historio...

Thus, I Read a Book: A Hybrid Volume of Essays on Modern India Historio...: यह पुस्तक Essays on The Modern India Historiography का ही एक रूप है| इस में English में लिखे matter का प्रति पैराग्राफ पर व...